प्रिय विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं समस्त विश्वविद्यालय परिवार अत्यंत हर्ष है कि हमारा विश्वविद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का मात्र केंद्र नहीं, बल्कि एक आदर्श नागरिक के व्यक्तित्व निर्माण नैतिक मूल्यों के संवर्धन और नवाचार का एक सशक्त मंच है।
आज के इस तेजी से बदलते परिवेश और सूचना व संचार की नवीन तकनीकों के बीच प्रसिद्ध विचारक, समाजसेवी, मनीषी श्री कुशाभाऊ ठाकरे जी जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय है, का कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समग्र विकास करना होना चाहिये। हमें ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो हमें न केवल पेशेवर रूप से सक्षम बनाए, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाए। मैं सभी विद्यार्थियों से अपेक्षा करता हूँ कि वे अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक दृष्टिकोण को अपनाते हुए अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर हों।
हमारा संकल्प है कि हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा शिक्षण प्रशिक्षण, शोध अनुसंधान के माध्यम से अपना सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। इसके लिए विश्वविद्यालय निरंतर नई तकनीकों, आधुनिक संसाधनों और उत्कृष्ट शिक्षण पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मैं सभी शिक्षकों से आग्रह करता हूँ कि वे विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दे और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचने में सक्रिय सहयोग दें।
आइए, हम सब मिलकर ज्ञान, नवाचार और मूल्यों पर आधारित एक सशक्त भविष्य का निर्माण करें।
आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
प्रो. मनोज दयाल
कुलपति