मोनोग्राम

 

 

 

 

 

 

मोनोग्राम में हम इस विश्वविद्यालय की अभिकल्पना और भावी क्रिया कलापों के दर्शन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य है वैश्विक संचार ग्राम की कल्पना के साथ-साथ, भारतीय चिंतन "वसुधैव कुटुम्बकम" का संश्लेषण हो, साथ ही अधुनातन तकनीकी विस्तार को भारतीय परंपरा और मूल्यों से जोड़ा जाए। देवर्षी नारद हमारे देश में पहले संप्रेषक या पत्रकार के रुप में जाने जाते हैं। उनके प्रतीक के रुप में एकतारा और खड़ताल दर्शाए गये हैं। सही अर्थों में देखें तो ग्रामीण अंचलों में इसी एकतारे और खड़ताल के द्वारा आज भी संदेशों का प्रभावी संप्रेषण होता है। उसके साथ इंटरनेट और अन्य अत्याधुनिक तकनीकी के प्रतीक के रुप में एक डिस्क दिखाई गई है। दोनो के सामंजस्य से संचार तरंगों का विस्तार प्रदर्शित है।

हम इस विश्वविद्यालय के रुप में एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र बनाना चाहते हैं जो छत्तीसगढ़ को वैश्विक मीडिया परिदृश्य में महत्व के स्थान पर प्रस्थापित करे। इसी कारण ग्लोब के उपर सिर्फ छत्तीसगढ़ के नक्शे को उभारा गया है। धान के कटोरे के नाम से प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ का नक्शा भी हरी धान की बालियों से ही बनाया गया है।

भद्रं नोअपि वातय मनो दक्षमुत क्रतुम यह ऋगवेद के 10/25/1 की ऋचा है। इस विश्वविद्यालय के संकल्प में मूल्य आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है। साथ ही संकल्प ऐसे वृतिज्ञ तैयार करने का है, जो राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी एवं निष्ठावान हो। ऐसे वृतिज्ञों का मन, अंतरात्मा और बुद्धि तीनों ही स्तर पर परिष्कार जरुरी है। इसीलिए इस ऋचा में प्रार्थना की गई है कि "हे देव हमारे मन को शुभ संकल्प वाला बनाओ, हमारी अंतरात्मा को शुभ कर्म करने वाला बनाओ और हमारी बुद्धि को शुभ विचार करने वाली बनाओ।"