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कुलपति की अपील

 मित्रो

 इस समय संपूर्ण विश्व कोरोना वायरस संकट से जूझ रहा है। मानवता के लिए यह अब तक के  सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरा है। हमारा देश व देशवासी भी इसे लेकर गंभीर चिंताओं से घिरे हैं। समाधानकारक बात यह है कि हमारे देश व प्रदेश का नेतृत्व इस ओर अत्यंत सजग है और लगातार दिशा-निर्देशों के माध्यम से ना केवल इस महामारी से नागरिकों की जीवन सुरक्षा में  सन्नध्द है, बल्कि जरूरतमंदों के लिए आश्रय, खानपान व  औषधोपचार आदि व्यवस्थाओं में पूरा सरकारी तंत्र दिन-रात जुटा है। चिकित्सा विभाग से जुड़े सभी डॉक्टरों से लेकर अन्य कर्मचारीगण अपनी जान जोखिम में डालकर भी आवश्यकता अनुसार चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में संलग्न हैं। माननीय प्रधानमंत्री द्वारा गत 25 मार्च को घोषित देशभर में लॉकडाउन इस बीमारी से बचने व इसके प्रसार को रोकने का सबसे कारगर उपाय है। "सोशल डिस्टेंसिंग" और घरों से न निकलना ही लॉकडाउन को सफल बनाने की एकमात्र गारंटी है। इसका पूरी कड़ाई से पालन करना ही कोरोना की बढ़ती चेन को तोड़ेगा।
महामहिम राज्यपाल महोदया ने भी राज्य के विश्वविद्यालयों के माननीय कुलाधिपति होने के नाते विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों तथा उनके परिजन व आसपास के लोगों के बचाव एवं सुरक्षा के लिए सजगता हेतु कुलपतियों को निर्देश जारी किए हैं। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय प्रशासन उनके परिपालन में पूरी तरह सन्नध्द है ताकि हमारा वृहद विश्वविद्यालय परिवार अपनी जागरूकता और सतर्कता से इस संकट को तो परास्त करे ही, स्वयं स्वस्थ व सुरक्षित रहते हुए जनसामान्य को भी सुरक्षित व जागरूक रखने में भूमिका निभा सके।
माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य शासन हर मोर्चे पर इस आपदा के निवारण में  अहर्निश जुटा है।  परिणामत: हम सबके लिए यह सुखद और आशाजनक है कि देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले अपने प्रदेश छत्तीसगढ़ में स्थितियां नियंत्रण में है। राज्य में हम सब की यह जिम्मेदारी है कि माननीय मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग के प्रयत्नों में निरंतर सहभागी बने रहें।
गत 25 मार्च को भी कुलपति की ओर से विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर इस संकट में जागरूकता व अपनी भूमिका निभाने के संदर्भ में एक अपील की गई थी। इस कड़ी में अपने विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों, शिक्षकों व शिक्षणेतर समस्त कर्मचारियों से आग्रह है कि लॉकडाउन का कड़ाई से पालन करें व सोशल मीडिया माध्यमों यथा व्हाट्सएप, एसएमएस, इंटरनेट या अन्य के द्वारा अपने परिचितों, मित्रों, संबंधियों व आसपास के लोगों को भी घरों से न निकलने, सोशल डिस्टेंसिंग और लगातार हाथ धोते रहने- सैनिटाइजर का उपयोग करने-स्वच्छता आदि स्वास्थ्य उपायों के प्रति सतत जागरूक करते रहें। विश्वविद्यालय का कम्युनिटी रेडियो 90.8 एफएम भी इस संबंध में लगातार प्रसारण कर रहा है।
हम सबकी सामूहिक जागरूकता व प्रयासों से ही देश इस संकट पर विजय पा सकेगा। एक जागरूक नागरिक के नाते हम सब क्रियाशील रहें। क्योंकि किसी की भी जरा सी लापरवाही बहुतों को संकट में डाल सकती है। घरों में रहने के कारण शरीर और मन दोनों की शक्ति बनाए रखना जरूरी है। इसे उद्विग्नता के रूप में नहीं बल्कि अवसर के रूप में लें क्योंकि घरों में सबके साथ आत्मीयता के साथ रहना आज की व्यस्तताओं में कम ही हो पाता है। खान-पान में संयम, स्वास्थ्यकर भोजन, योग- व्यायाम-ध्यान आदि आज की एक नियमित दिनचर्या बनाकर चलें तो यह इस संकट से उबरने में लाभकारी रहेगा।
इस मौके को छुट्टियों के रूप में न मानकर अपनी रचनात्मकता व कौशल को निखारने का अवसर मानें। शिक्षक व विद्यार्थी अपनी पढ़ाई, पाठ्यक्रम व परीक्षा की तैयारी के लिए भी ऑनलाइन माध्यमों से संलग्न रहें। इस विषय में पूर्व में भी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। तदनुसार विश्वविद्यालय के शिक्षक व शिक्षककर्मी प्रयत्नशील हैं। छात्र-छात्राएं इसका पूरा लाभ उठाएं व उनके साथ निरंतर ऑनलाइन संवाद व संपर्क के द्वारा अपनी पढ़ाई को पिछड़ने ना दें व अपनी शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूर्ण करते रहें।
विश्वविद्यालय शिक्षा का केंद्र होने के कारण सामाजिक जागरूकता का भी केंद्र होता है । अतः पुन: आप सबसे अनुरोध है कि अपने स्वास्थ्य व जिम्मेदारी के प्रति सजग रहें व दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करें। सुरक्षित रहें और दूसरों को सुरक्षित रखें। मेरी अनंत शुभकामनाएं।

 

 

   

-  प्रोफेसर बल्देव भाई शर्मा